शेर-ओ-शायरी

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कहते हैं जब रही न मुझमें ताकते-सुखन,
जानूँ किसी के दिल की मैं क्यों कर कहे बगैर।

-मिर्जा गालिब


1.ताकते-सुखन - बात करने की ताकत


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कहर हो, बला हो, जो कुछ हो,
काश ! तुम मेरे लिये होते।
मेरी किस्मत में गम गर इतना था,
दिल भी यारब कई दिये होने।
-मिर्जा गालिब


1.कहर - (i) दैवी आपत्ति, बलाए-आसमानी (ii) क्रोध, गुस्सा

2.बला- मुसीबत
 

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कहाँ हम कहाँ वस्ले-जानां की हसरत,
बहुत है उन्हें इक नजर देख लेना।
-हसरत मोहानी


1.वस्ले-जानां - माशूक से मिलन

 

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कहीं जवाब है इस हद के बदगुमानी का,
कि शुक्र भी जो करूँ आप इसे गिला कहिए।

-शाद अजीमाबादी


1.बदगुमानी - किसी की ओर से बुरा खयाल, कुधारणा
 

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