शेर-ओ-शायरी

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काटा गया न कुर्बते-पैहम के बावजूद,
वह फासिला जो देखने में फासिला न था।

-साहिर नौबहार मडरिया


1.कुर्बते-पैहम - लगातार पास होना
 

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काबा किधर है शुक्र का सिज्दा अदा करूँ,
अल्लाह आप आये हैं मेरे मकान पर।

साकिब लखनवी

 

1.काबा-मक्के क़ी एक इमारत जिसे मुसलमान इश्वर का घर मानते हैं

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कासिद पयामे-शौक को देना न बहुत तूल,
कहना फकत यह उनसे कि आंखें तरस गईं।
जलील मानिकपुरी


1.कासिद - डाकिया 2.पयाम - संदेश

 

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कितने कांटों की बद्दुआ ली है
चन्द कलियों की जिन्दगी के लिए।

-शहीद फातिमी

 

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