शेर-ओ-शायरी

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किधर है बर्के-सोजां काश यह हसरत भी मिट जाती,
बनायें तिनके चुन-चुनकर हम अपना आशियाँ कब तक।

-दिल शाहजहाँपुरी


1.बर्के-सोजां - कौंधती बिजली
 

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किया गमख्वार ने रूसवा, लगे आग इस मुहब्बत को,
न लाये ताब जो गम की, वो मेरा राजदां क्यों हो।

-मिर्जा गालिब


1.गमख्वार - सहानुभूति दिखाने  वाला, हमदर्द 2.ताब- शक्ति

3.राजदां - भेद जानने वाला, मित्र, दोस्त
 

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किया फिर तुमने रोता देखकर दीदार का वादा
कि फिर बहते हुए पानी पै बुनियादे-मकां रख दी।
-आर्जू लखनवी


1.दीदार - दर्शन

 

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किस मुंह से जाके शिकवा-ए-जौरो-जफा करें,
मरते हैं और, आप की पशेमानियों से हम।
-त्रिलोकचन्द महरूम


1.जफा -जुल्मोसितम 2.पशेमानी- पश्चाताप, अफसोस

 

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