शेर-ओ-शायरी

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किसका कुर्ब कहाँ की दूरी अपने आप में गाफिल है,

राज  अगर  पाने  का  पूछो, खो  जाना ही पाना है।

           -अर्श मल्सियानी

 

1.कुर्ब  सामीप्य, निकटता

 

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किसी से छूट के शाद,किसी से मिल के शाद,
'फिराक' तेरी मुहब्बत का, कोई ठीक नहीं।

-फिराक गोरखपुरी


1.शाद - प्रसन्न, खुश
 

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कीजिए और भी जुल्म अगर जिद है यही,
लीजिए और मेरे लब पै दुआएं आईं।

-जिगर मुरादाबादी

 

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कुछ इख्तियार नहीं किसी का तबिअत पर,
यह जिस पर आती है बेइख्तियार आती है।
-जलील मानिकपुरी


1.बेइख्तियार - सहसा, बेतहाशा

 

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