शेर-ओ-शायरी

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कुछ इस अदा से आज वह पहलूनशीं रहे,
जब तक हमारे पास रहे, हम नहीं रहे।

-जिगर मुरादाबादी


1.पहलूनशीं - पास बैठने वाला, पास में

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कुछ इस अदा से यार ने पूछा मेरा मिजाज,
कहना ही पड़ा शुक्र है परवरदिगार का।

-साकिब लखनवी

 

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कुछ और तो नहीं मेरे गरीब दामन में,

अगर  कबूल  हो  तो  जिन्दगी  दे  दूँ।

 

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कुछ कटी हिम्मते-सवाल में उम्र,
कुछ उम्मीदे-जवाब में गुजरी।
-फानी बदायुनी
 

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