शेर-ओ-शायरी

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क्यों बढ़ाते हो इल्तिफात बहुत,
हमको ताकत नहीं जुदाई की।

-ख्वाजा हाली
1.इल्तिफात - (i) कृपा, दया, (ii) तवज्जुह

 

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खत लिखेंगे गर्चे मतलब कुछ भी हो,
हम तो आशिक हैं तुम्हारे नाम के।
दिल को आंखों ने फसाया क्या मगर,
ये भी हल्के हैं तुम्हारे दाम के।
इश्क ने 'गालिब' निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।
-मिर्जा गालिब


1.हल्का - घेरे, परिधि 2.दाम - (i) फंदा, पाश (ii) बंधन, जाल

 

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खबर इसकी नहीं, उन खामकाराने-मुहब्बत को,
उसी को दुख भी देते हैं जिसे, अपना समझते हैं।
-जिगर मुरादाबादी


1.खामकाराने-मुहब्बत - अनुभवविहीन मुहब्बत करने वाला, मुहब्बत में कच्चा

 

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खिजाँ के दौर में उस पर बहार आ जाये,
तेरी निगाह को जिस पर भी प्यार आ जाये।
जो आप की इनायत हो तो मजाल कहाँ,
मेरे करीब गमे - रोजगार आ जाये।

-नसीम मजहर


1.खिजाँ
- पतझड़ की ऋतु
 

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