शेर-ओ-शायरी

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खुलूसे-दिल से हों सिज्दे तो उन सिज्दों का क्या कहना,

सरक  आया  वहीं  काबा जहाँ  हमने  जबीं   रख  दी।

 

1.खुलूसे-दिल से - सच्चे दिल से   2.काबा - मक्के की एक इमारत जिसे       मुसलमान ईश्वर का घर समझते हैं 3.जबीं - माथा, ललाट, भाल

 

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खुश होते है पर वस्ल में यूं मर नहीं जाते,
आई शबे-हिज्रां की तमन्ना मेरे आगे।

-मिर्जा गालिब


1.वस्ल - मिलन 2.शबे-हिज्रां - जुदाई की रात

 

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गजब किया तेरे वादे पै ऐतबार किया,
तमाम रात कयामत का इन्तिजार किया।
-मिर्जा दाग
 

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गफलतशिआरियों पर क्यों इस तरह हो नादिम,
मैं सच ही मान लूँगा, कर दो कोई बहाना।
-शकील बदायुनी


1.गफलतशिआरियों
पर - गलतियों, त्रुटियों या भूलों पर

2. नादिम - लज्जित, शर्मिंदा

 

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