शेर-ओ-शायरी

<< Previous  मोहब्बत (Love)  Next>>

गये हैं जब से वह अपने भी आये, गैर भी आये,
सब आये भी, गये भी, घर की वीरानी नहीं जाती।

-नातिक गुलगठवी

 

*****

 

गर किया नासेह ने हमको कैद, अच्छा यूँ सही,
पर जुनूने - इश्क के अंदाज छूट जायेंगे क्या?

-मिर्जा गालिब


1.नासेह - नसीहत करने वाला, सदुपदेशक

 

*****


गरज कि काट दिए जिन्दगी के दिन ऐ दोस्त,
वह तेरी याद में हो या तुम्हें भुलाने में।
-फिराक गोरखपुर


1.गरज
किसारांश यह है कि,किस्सा-ए-मुख्तसर यह है कि
 

*****


'गालिब' तेरा अहवाल सुना देंगे हम उनको,
वह सुन के बुलाले, यह इजारा नहीं करता।
-मिर्जा गालिब


1.अहवाल - समाचार, हाल 2.इजारा - ठेका (यानी प्रतिज्ञा या वादा)

 

*****

 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74-75-76-77-78-79-80-81-82-83-84-85-86-87-88-89-90-91-92-93-94-95-96-97-98-99-100-101-102-103-104-105-106-107-108-109-110-111-112-113-114-115-116-117-118-119-120-121-122-123-124-125-126-127-128-129-130-131-132-133-134-135-136-137-138-139-140-141-142-143-144-145-146-147-148-149-150-151-152-153-154-155-156-157-158-159-160      Next>>