शेर-ओ-शायरी

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गैर की नजरों से बचके, सबकी मर्जी के खिलाफ,
वह तेरा चोरी-छुपे रातों को आना याद है।

-हसरत मोहानी

 

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गैर को आने न दूँ, तुमको कही जाने न दूँ,
काश मिल जाये, तुम्हारे दर की दरबानी मुझे।

-हैरत बदायुनी

 

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गो मैं रहा रहीने-सितमहाए-रोजगर,
लेकिन तेरे खयाल से गाफिल नहीं रहा।
-मिजा गालिब


1.रहीने-सितमहाए-रोजगर - रोज-रोज के अत्याचारों का बंधक (यानी शिकार) 2.गाफिल - बेखबर, बेसुध, अचैतन्य ,असावधान

 

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घबरा न हिज्र में बहुत ऐ जाने-मुज्तरिब,
थोड़ी-सी रह गयी है, उसे भी गुजार दे।
-अमीर मीनाई

 

1.हिज्र - वियोग, विरह, जुदाई

2.जाने-मुज्तरिब - बेकरार या व्याकुल जान

 

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