शेर-ओ-शायरी

<< Previous  मोहब्बत (Love)  Next >> 

अपने हाथों की लकीरों में बसा लो मुझको,
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना लो मुझको।
मुझसे तू पूछने आया है वफा के मायने,
यह तेरी सादादिली मार न डाले मुझको।
खुद को मैं कहीं बाँट न लूँ दामन – दामन,
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

-कतील शिफाई

 

*****


अपने-अपने हौसले,अपने तलब की बात है,
चुन लिया हमने तुम्हें सारा जहाँ रहने दिया।
-अदीब सहारनपुरी


1.तलब - इच्छा, ख्वाहिश, आरजू


*****


अब करके फरामोश तो नाशाद करोगे,
पर हम जो न होंगे तो बहुत याद करोंगे।
-मीरतकी मीर


1.फरामोश - भूलना 2. नाशाद - अप्रसन्न, दुखी

 

*****

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें ,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ।
-फराज अहमद
 

*****

 

<< Previous   page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74-75-76-77-78-79-80-81-82-83-84-85-86-87-88-89-90-91-92-93-94-95-96-97-98-99-100-101-102-103-104-105-106-107-108-109-110-111-112-113-114-115-116-117-118-119-120-121-122-123-124-125-126-127-128-129-130-131-132-133-134-135-136-137-138-139-140-141-142-143-144-145-146-147-148-149-150-151-152-153-154-155-156-157-158-159-160   Next >>