शेर-ओ-शायरी

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चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी,
वगरना हम जमाने भर को समझाने कहाँ जाते।

-कतील शिफाई
 

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चाहत के बदले हम तो बेच दें अपनी मर्जी तक,
कोई मिले तो दिल का गाहक, कोई हमें अपनाए तो।

-अंदलीब शादानी

 

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चाहें तो तुमको चाहें, देखें तो तुमको देखें,
ख्वाहिश दिलों की तुम हो, आंखों की आरजू हो।
-मीरतकी मीर
 

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चिरागे- जिन्दगी बुझा जा रहा है,
वह जाने-इन्तिजार आये न आये।
-सिकन्दर अली 'वज्द'


1.जाने-इन्तिजार - वह प्रेमिका या मित्र
जिसका इन्तिजार हो।

 

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