शेर-ओ-शायरी

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जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं,
सितम न हो तो मुहब्बत में कुछ मजा ही नहीं।

-मोहम्मद इकबाल


1. जफा - जुल्म, अत्याचार 2. सितम - जुल्म अत्याचार
 

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जफाएं तुम किए जाओ, वफाएं मैं किए जाऊं,
तुम अपने फन में कामिल हो, मैं अपने फन में यकता हूँ।

-'बेखुद' देहलवी


1.जफा - जुल्म, अत्याचार 2.कामिल - निपुण, दक्ष, होशियार
3.यकता - अद्वितीय, अनुपम, बेमिस्ल

 

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जब तक तेरा सितम न गंवारा हुआ मुझे,
तेरा करम भी मेरे लिये दुश्वार था।
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दर्द सईदी


1.करम - मेहरबानी, कृपा

 

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जब शम्मा  हँसी तब परवाने मासूम शरारत कर बैठे,
छोटा-सा दिल और ये जुर्रअत, शोलों से मुहब्बत कर बैठे।
-हसरत मोहानी


1. जुर्रअत - साहस, हिम्मत

 

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