शेर-ओ-शायरी

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जब  सब्र    गया  तो मुहब्बत कहाँ  रही,

मुज्तर दिलों में काम ही क्या है करार का।

 

1.मुज्तर - व्याकुल, बेचैन 2.करार - चैर, आराम

 

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जबीने-सिज्दा में कौनेन की वुसअत समा जाए,
अगर आजाद हो कैदे-खुदी से बंदगी अपनी।

-'असर' लखनवी


1.जबीन - माथा, ललाट, भाल 2.कौनेन - दोनों संसार, यह संसार और ऊपरी संसार (यानी परलोक) 3.वुसअत - लंबाई-चौड़ाई, विशालता
4.खुदी - अहंकार, अहंभाव, यह भाव कि बस हमीं हम है, अभिमान, घमंड, गर्व 5.बंदगी - इबादत, पूजा
 

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जरा देख परवाने करवट बदलकर,
सती हो गई शम्अ महफिल में जलकर।

-साकिब लखनवी

 

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जल भी जा बदनसीब परवाने,
शम्अ की जिन्दगी दराज नहीं।
-अब्दुल हमीद अदम


1. दराज - लंबी, तवील

 

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