शेर-ओ-शायरी

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अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।
-जलील मानिकपुरी


1.आस्ताँ - चौखट, दहलीज, ड्योढी

 

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अब जाके आरजू का मुकम्मल हुआ है नक्श,
सब मानने लगे हैं कि मैं दीवाना हो गया।
-मुनव्वर लखनवी


1.नक्श - चित्र, तस्वीर
 

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अब तक न खबर थी, मुझे उजड़े हुए घर की,
तुम आए तो घर बेसरोसामां नजर आया।


1.बेसरोसामां - जिंदगी के जरूरी सामान के बिना

 

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अब बुझा दो ये सिसकते हुए यादों के चराग,
इनसे कब हिज्र की रातों में उजाला होगा।
-खलीलुर्रहमान आजमी


1.हिज्र - वियोग, जुदाई

 

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