शेर-ओ-शायरी

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जीना मरना हिज्र के बीमार का क्या चीज है,
इक तेरे आने का नाम, इक तेरे जाने का नाम।

-अजीज बीकानेरी


1.हिज्र - वियोग, विरह


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जीने का लुत्फ सारा उल्फत की याद में हैं,
पहले जो दर्दे-दिल था, वह अब सुकूने-जां है।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.उल्फत - मुहब्बत

 

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जुज जमीले-कू-ए-जानां, कुछ नहीं पेशे-निगाह,
जिसका दरवाजा नजर आया, सदा देने लगे।
-साकिब लखनवी


1.जुज - अलावा, अतिरिक्त 2.
कू-ए-जानां, - प्रेमिका की सुन्दर गली

3. पेशे-निगाह - आँखों के सामने

 

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जुस्तजू ही दिलों की मंजिल थी, हमने खोकर तुझे, तुझे पाया।
जिन्दगी नाम है जुदाई का आप आये तो मुझे याद आया।

-नरेश कुमार शाद


1.जुस्तजू - तलाश, खोज
 

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