शेर-ओ-शायरी

<< Previous  मोहब्बत (Love) Next>>

तअम्मुल तो था उनके आने में कासिद,
मगर यह बता तर्जे-इन्कार क्या थी।
-मोहम्मद इकबाल


1. तअम्मुल - (i)विलम्ब, ढील, शंका, संदेह संकोच (ii) असमंजस, पसोपेश 2.कासिद - डाकिया

 

*****

 

तकमीले-आशिकी की बस दो ही सूरतें हैं,
मह्वे -नियाज बन जा या बेनियाज हो जा।

-माहिर-उल-कादिरी


1.तकमीले-आशिकी - प्रेम की पूर्णता या पराकाष्ठा
3. मह्वे –नियाज - नियाजमंद, आज्ञाकारी, ताबेदार, भक्त
3.बेनियाज - जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो, निष्पृह

 

*****


तड़पते देखता हूँ जब कोई शै,
उठा लेता हूँ अपना दिल समझकर।

-तसलीम

 

*****


तमाम उम्र यूँ ही हो गयी बसर अपनी,
शबे-फिराक गयी, रोजे-इन्तिजार आया।
-नासिख


1.शबे-फिराक - विरह की रात 2.रोजे-इन्तिजार - इन्तिजार का दिन

 

*****

 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74-75-76-77-78-79-80-81-82-83-84-85-86-87-88-89-90-91-92-93-94-95-96-97-98-99-100-101-102-103-104-105-106-107-108-109-110-111-112-113-114-115-116-117-118-119-120-121-122-123-124-125-126-127-128-129-130-131-132-133-134-135-136-137-138-139-140-141-142-143-144-145-146-147-148-149-150-151-152-153-154-155-156-157-158-159-160      Next>>