शेर-ओ-शायरी

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तमाम उम्र तेरा इन्तिजार कर कर लेंगे,
मगर यह रंज रहेगा कि जिन्दगी कम है।
-शाहिद सिद्दकी

 

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तय होंगे जिन्दगी के कड़े कोस किस तरह,

जब तुम  ही  इस  सफर में हमसफर  नहीं।

 

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तुझसे मिले न थे तो कोई आरजू नहीं,
देखा तुम्हें तो तेरे तलबगार हो गये।

- जिया अकबराबादी


1.तलबगार - इच्छुक, अभिलाषी, ख्वाहिशमंद
 

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तुम अपना रंजोगम अपनी परीशानी मुझे दे दो,
मुझे अपनी कसम यह दुःख,यह हैरानी मुझे दे दो।
मैं देखूं तो सही यह दुनिया तुझे कैसे सताती है,
कोई दिन के लिये तुम अपनी निगहबानी मुझे दे दो।
ये माना मैं किसी काबिल नहीं इन निगाहों में,
बुरा क्या है अगर इस दिल की वीरानी मुझे दे दो।

-साहिर लुधियानवी
 

1.निगहबानी - देखरेख

 

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