शेर-ओ-शायरी

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तुम क्या मिले कि फैले हुए गम सिमट गये,
सदियों के फासिले जो थे, लमहों में कट गये।
-अय्याज झांसवी
 

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तुम जानो तुमको गैर से जो रस्मोराह हो,
मुझको भी पूछते रहो तो क्या गुनाह हो।
सुनते हैं जो बहिश्त की तारीफ सब दुरूस्त,
लेकिन खुदा करे वह तेरी जल्वागाह हो।
-मिर्जा गालिब


1.रस्मोराह - मेज-जोल, मेल-मिलाप 2.बहिश्त - स्वर्ग, जन्नत
3.जल्वागाह - जल्वा (अपने को बनाव-सिंगार करके दिखाना) दिखाने का स्थान, प्रेमिका का घर 

 

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तुम जो याद आये तो सारी कायनात,
एक भूली - सी कहानी हो गई।

-जलील मानिकपुरी


1.कायनात - (i) सृष्टि, ब्रहमांड (ii) दुनिया, संसार
 

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तुम न आओगे तो मरने की हैं सौ तदबीरें,
मौत कुछ तुम तो नहीं हो कि बुला भी न सकूँ।

-मिर्जा 'गालिब'


1.तदबीर - उपाय, तरकीब

 

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