शेर-ओ-शायरी

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अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें,
कुछ दर्द तो कलेजे से लगाने के लिए हैं।
यह इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें,
इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए है।

-नूह नारवी


1.रिसाले - पुस्तक

 

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अभी तो दिल में हल्की-सी कसक मालूम होती है,
बहुत मुमकिन है कल इसका मुहब्बत नाम हो जाये।
-शेरी भोपाली


1. कसक - दर्द, तकलीफ


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'अर्श' पहले यह शिकायत थी खफा होता है वह,
अब यह शिकवा है कि वह जालिम खफा होता नहीं।
-अर्श मल्सियानी

 

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साकी की पड़ी मुझ पर,
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आयेंगे।
-मजरूह सुल्तानपुरी


1.तिश्नगी -(i) प्यास, पिपासा, तृष्णा (ii) लालसा, अभिलाषा, इश्तियाक
2.कामिल - पूरा, सम्पूर्ण, मुकम्मल 3.पैमाना - शराब का गिलास, पानपात्र

 

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