शेर-ओ-शायरी

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तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं,
मैं वो खोई हुई इक चीज हूँ जिसका पता तुम हो।


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तुम्हारी बज्म में हम खुद संभल जाते यह मुश्किल था,
तुम्ही बेताब करते थे, तुम्ही फिर थाम लेते थे।
-जलाल लखनवी


1.बेताब - आगे बढ़ने

 

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तुम्हारी याद के जब जख्म भरने लगते है,
किसी बहाने तुमको याद करने लगते हैं।
-फैज अहमद फैज
 

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तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से,
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराये हैं।
मेरे हमराह भी रूसवाइयाँ हैं मेरे माजी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातों के साये है।

-साहिर लुधियानवी


1.हमराह - (i) साथ (ii) रास्ते का साथी, साथ चलने वाला

2.माजी - अतीत
 

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