शेर-ओ-शायरी

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तेरे वादे पै जिये हम, तो ये जान झूठ जाना,
कि खुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता।
कोई मेरे दिल से पूछे, तेरे तीरे-नीमकश को,
ये खलिश कहाँ से होती, जो जिगर के पार होता।
ये न थी हमारी किस्मत, कि विसाले-यार होता,
अगर और जीते रहते, यही इन्तिजार होता।

-मिर्जा गालिब
1.तीरे-नीमकश - वह तीर जो घाव में आधा खींचकर छोड़, दिया गया हो
2.खलिश - (i) दर्द की टीस, चुभन (ii) चिन्ता, फिक्र, उलझन
3.विसाल - मिलन, संयोग, वस्ल
 

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तेरे सर की कसम गर तू न हो मेरे तसव्वर में,
मेरी नाजुक तबिअत पर यह दुनिया बार हो जाय

-सागर निजामी


1.तसव्वर - कल्पना, खयाल 2.बार - भार, बोझ

 

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तेरे सवाल पै चुप हैं, इसे गनीमत जान,
कहीं जवाब न दे दें कि मैं नहीं सुनता।
-मिर्जा गालिब
 

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थी वह एक शख्स के तसव्वर से,
अब वह रानाइए-खयाल कहाँ।
-मिर्जा गालिब


1.तसव्वर - खयाल, कल्पना

2.रानाइए-खयाल - खयालों की सुन्दरता, खूबसूरत खयाल
 

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