शेर-ओ-शायरी

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अश्क बनकर आई हैं वह इल्तिजाएं चश्म तक,
जिनको कहने के लिए होठों पै गोयाई नहीं।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.इल्तिजाएं - प्रार्थनाएं, दरखास्त 3.चश्म - आँख, नेत्र
4.गोयाई - बोलने की ताकत


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आंखों ने जरे-जर्रे पर सिज्दे लुटाये हैं,
क्या जाने, जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ।

-अख्तर शीरानी


1.पर्दानशीं - पर्दे में रहने वाली यानी माशूक

 

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आ मैं तुझे बता दूँ, राजे-गमे-मुहब्बत,
एहसासे-आरजू ही, तकमीले-आरजू है।
-माहिल-उल कादिरी


1.तकमील - पूर्ति, समाप्ति (ii) पूर्णता, किसी काम की पूर्ति में कोई कसर न रहना

 

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