शेर-ओ-शायरी

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दम लिया था न कयामत ने हनोज,
कि तेरा वक्ते-सफर याद आया।
जिन्दगी यूँ भी गुजर ही जाती,
क्यों तेरा राहगुजर याद आया।
कोई वीरानी - सी वीरानी है,
दश्त को देखकर, घर याद आया।

-मिर्जा गालिब


1.दम - सांस, श्वास 2..हनोज - अभी 3.राहगुजर - पंथ,रास्ता
4.दश्त - जंगल, वन,  बियाबान
 

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दर्द-ए-दिल, सोजे-जिगर, अश्के-रवाँ, दागे -फिराक
सच तो यह है आपके एहसाँ है मुझपर बेशुमार।

-त्रिलोकचन्द महरूम


1.सोजे-जिगर - दिल की तपिश या जलन 2.अश्के-रवाँ - बहते आंसू
3.दागे –फिराक - विरह का गम

4.बेशुमार - अनगिनत, असंख्य, बहुत अधिक

 

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दिखाकर इक झलक सामाने-राहत जिसने लूटा था,
निगाहें ढूँढ़ती हैं फिर उसी गारतगरे-जाँ को।
-जिगर मुरादाबादी


1.गारतगरे-जाँ - जान पर डाका डालने वाला यानी सुखचैन छीनने वाला

 

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