शेर-ओ-शायरी

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दिल है किसका जिसमें अरमाँ आप का रहता नहीं,
फर्क इतना है कि सब कहते हैं मैं कहता नहीं।
-'नातिक' लखनवी
 

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दिले-नादाँ तुझे हुआ क्या है, आखिर इस दर्द की दवा क्या है,
हम हैं मुश्ताक और वो बेजार या इलाही ये माजरा क्या है?
हम भी मुंह में जुबान रखते हैं, काश पूछो कि मुद्दआ क्या है,
हमको उनसे वफा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफा क्या है
जान तुम पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है?
-मिर्जा गालिब


1.मुश्ताक - अभिलाषी, ख्वाहिशमंद 2. इलाही- हे खुदा

3. बेजार -(i) विमुख, मुंह फेरे हुए (ii) क्रुद्ध, अप्रसन्न, नाखुश

 

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दिले-महबूब काशाना हो जिसका
वह गम कितना हसीनो-नाजनीं है।

-रविश सिद्दकी


1.काशाना - मकान, घर 2.हसीनो-नाजनीं - हसीन और कोमल
 

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दूरअंदेशियाँ मुहब्बत की,
बेवफाओं को बावफा कहना।

-अकबर हैदरी


1.बावफा - नमकहलाल, स्वामि भक्त, वफादार

 

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