शेर-ओ-शायरी

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देखना किस्मत कि आप अपने पै रश्क आ जाये है,
मैं उसे देखूँ भला कब मुझसे देखा जाये है।
-मिर्जा गालिब


1.रश्क - ईर्ष्या

 

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देखे हैं इतने ख्वाब की अब अपने रू-ब-रू,
उनको भी देख लूँ तो समझता हूँ ख्वाब है।


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दैर में या हरम में गुजरेगी,
उम्र तेरे ही गम में गुजरेगी।
-फानी बदायुनी


1.दैर - मुर्तिगृह, बुतखाना 2.हरम - काबा, खुदा का घर

 

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दो घड़ी वो जो पास आ बैठे,
हम जमाने से दूर जा बैठे।


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