शेर-ओ-शायरी

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  आते  हमें इसमें  तकरार  क्या थी,

मगर  वादा  करते हुए आर कया थी।

       -मोहम्मद इकबाल

 

1.तकरार-झगडा, विवाद 2.आर -लज्जा, लाज
 

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न कहो फिर कि यार जाता है,
दिल से सब्रो-करार जाता है।
-गुलाम मुस्तफा यकरंग
 

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न कोई वादा, न कोई यकीन, न कोई उम्मीद,
मगर हमें तो तेरा इन्तिजार करना था।
-फिराक गोरखपुरी

 

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न घबरा कैदो-पाबंदी से, पाबंदी है वह दौलत,
कि बन जाता है दूर्रे-बेबहाँ, इक बूँद भर पानी।

-जोश मलीहाबादी


1.दूर्रे-बेबहाँ - बेशकीमती मोती
 

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