शेर-ओ-शायरी

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नजर में ढल के उभरते हैं, दिल के अफसाने,
यह और बात है कि दुनिया नजर न पहचाने।

-फैज अहमद फैज

 

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नज्अ के आलम में गुजरा है मेरा दौरे-फिराक,
मौत के दामन में खेली जिन्दगी तेरे बगैर।
-मिर्जा गालिब


1.नज्अ - मौत 2.दौरे-फिराक - विरह के दौरान 

 

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नया बिस्मिल हूँ मैं वाकिफ नहीं रस्मे-शहादत से,
बता दे तू ही ऐ जालिम तड़पने की अदा क्या है।
-चकबस्त लखनवी


1.बिस्मिल - घायल
(प्रेम के तीर से)

2.रस्मे-शहादत - जान देने के तौर -तरीके

 

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नये जमाने में अगर खुद को उदास पाऊंगा,
यह शाम याद करके अपने गम को भूल जाऊंगा।

-फिराक गोरखपुरी
 

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