शेर-ओ-शायरी

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पास जायें तो होश खो बैठें ,
दूर रहिए तो जाँ पै बनती है।

-साहिल मानिकपुरी
 

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पास रहकर यह  तकल्लुफ, साथ  रहकर  यह  हिजाब,

मेरा  उनका  फासिला  गोया  कई  मंजिल  का  है।

-'दिल' शाहजहाँपुरी

 

1. हिजाब-घूँघट, मुखावरण 2.गोया-मानो, जैसे

 

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पुतलियों की आखिरी गर्दिश की साअत आ गई,
आने वाले आ कि कब तक रास्ता देखा करूँ।

-माहिर-उल-कादिरी


1.गर्दिश - (i) चक्कर, फिराव (ii) दुर्भाग्य, बदकिस्मती

2.साअत - पल, समय

 

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पैगाम लिया है कभी पैगाम दिया है,
आंखों ने मुहब्बत में बड़ा काम किया है।
-हफीज बनारसी
 

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