शेर-ओ-शायरी

<< Previous  मोहब्बत (Love) Next>>

       फिर  न  आये  वह  जो  वादा  करके  गये,

आज   का  दिन  है  और  वह  दिन  है।

-'असर' लखनवी

 

*****

 

फिर  दिल  के  ख्वाबगाह  में  माजी का बांकपन,

आवाज   दे  रहा  था  कि  तुम  याद  आ  गये।

 

1.ख्वाबगाह-शयनागार, शबिस्तां, रात में रहने का स्थान

2.माजी-अतीत, बीता हुआ समय

 

*****


फिर वही शाम, वही गम, वही तन्हाई है,
दिल को समझाने तेरी याद चली आई है।
-राजेन्द्र कृष्ण

 

*****

 

फिर हम कहाँ, कहाँ तुम, जी भर के देखने दो,
अल्लाह, कितनी मुद्दत तुमसे जुदा रहे हैं।

-असर लखनवी
 

*****

 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58-59-60-61-62-63-64-65-66-67-68-69-70-71-72-73-74-75-76-77-78-79-80-81-82-83-84-85-86-87-88-89-90-91-92-93-94-95-96-97-98-99-100-101-102-103-104-105-106-107-108-109-110-111-112-113-114-115-116-117-118-119-120-121-122-123-124-125-126-127-128-129-130-131-132-133-134-135-136-137-138-139-140-141-142-143-144-145-146-147-148-149-150-151-152-153-154-155-156-157-158-159-160      Next>>