शेर-ओ-शायरी

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बन गया वो सह लिये जिसने तेरे जुल्मो-सितम,
मिट गया वो जिस पै तेरी मेहरबानी हो गई।

-शकील बदायुनी
 

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बयाने - शौक पै माइल वो कमनजर होंगे,
जब्ते-शौक की लज्जत से जो बेखबर होंगें।

-मख्मूर सईदी
1.बयानेशौक -चाहत का बयान या कहना 2.माइल - प्रवृत्त, आकर्षित, आसक्त 3.जब्ते-शौक - चाहत या मुहब्बत प्रकट न होने देना, प्रेम की व्यथा का इजहार न करना 4.लज्जत - आनन्द, सुख

 

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बस इक लतीफ तबस्सुम, इक हसीन नजर,
मरीजे-गम की हालत संभल तो सकती है।
-सलाम मछलीशहरी


1.लतीफ - (i) कोमल, नर्म, मृदुल, नाजुक (ii) बहुत ही हलका फुलका

 (iii) शुद्ध, पवित्र, पाकसाफ 2.तबस्सुम - मुस्कान 3.मरीजे-गम - विरह का मरीज
 

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बस एक फूल नुमायां है दिल के दागों में,
यहीं रूकी थी तेरी चश्मे-इल्तिफात कभी।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.नुमायां - प्रकट 2.दाग - (i) दुख, क्लेश, रंज (ii) चिन्ह,धब्बा,निशान
3. चश्मे-इल्तिफात - (i)कृपादृष्टि, दयादृष्टि (ii) प्रणय-कटाक्ष

 

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