शेर-ओ-शायरी

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उठा सके आदमी तो पहले नजर से अपनी नकाब उठाए,
जमाने भर की तजल्लियों से नकाब उल्टी हुई मिलेगी।
-नवाब झांसवी


1.नकाब - पर्दा, घूँघट, ओट, आड़
2.तजल्ली  - (i) आभा, प्रकाश, नूर, रौशनी (ii) प्रताप, जलाल (iii) अध्यात्मज्योति, नूरे-हक
 

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एक से लगते हैं सब ही कौन अपना, कौन गैर,
बेनकाब आये कोई तो, हम दरे -दिल वा करें।
-खलील


1.दरे–दिल - दिल का दरवाजा 2. वा - खोलना

 

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जलवे की रोकथाम करेगा हिजाब क्या,
दरिया के आगे आबे-रवाँ की बिसात क्या?
-हसन बरेलवी


1.हिजाब - (i) आड़, पर्दा, ओट (ii) मुखावरण, बुर्का, पर्दा

2.आबे-रवाँ - तेजी से बहता पानी 3.बिसात - साहस, हिम्मत, सामर्थ्य
 

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तेरे और उसके दरमियाँ, तेरी खुदी हिजाब है,
अपना निशान खोयेजा, उसका निशान पायेजा।
-अख्तर शीरानी


1.खुदी - अहंकार, घमंड, अहंभाव, यह भाव कि बस हमीं हम हैं,अभिमान 2.हिजाब - पर्दा

 

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