शेर-ओ-शायरी

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आँख उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले,
रस्मन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं।


1.रस्मन - परम्परानुसार,  रिवाज के तौर पर ,रिवाज के मुताबिक

 

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एक से लगते हैं सब ही कौन अपना, कौन गैर,
बेनकाब आये कोई तो, हम दरे -दिल वा करें।
-खलील


1.दरे–दिल - दिल का दरवाजा 2. वा - खोलना

 

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कहां मैखाने का दरवाजा 'गालिब' और कहां वाइज,
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले।
-'मिर्जा 'गालिब'


1.मैखाना - शराबखाना 2.वाइज- सदुपदेशक, धर्मोपनिदेशक

 

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यह कहाँ की दोस्ती है कि बने है दोस्त नासेह,
कोई चारासाज होता, कोई गमगुसार होता।
-मिर्जा गालिब


1.नासेह - नसीहत करने
वाला , उपदेश देने वाला

2. चारासाज - चिकित्सक, इलाज करने वाला 3. गमगुसार - सहानुभूति

दिखाने वाला, हमदर्द, गमख्वार 

 

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लड़ते हैं जाके बाहर ये शैख-ओ-बिरहमन,
पीते हैं मयकदे में सागर बदल बदल कर।
-माइल देहलवी


1.सागर - पियाला


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