शेर-ओ-शायरी

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उन गुलों से तो कांटे अच्छे
जिनसे होती है तौहीने- गुलशन।

1.तौहीने- गुलशन - बगिया की बेइज्जती

 

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उलझ पड़ूँ किसी के दामन से वह खार नहीं
वह फूल हूँ जो किसी के गले का हार नहीं।
-चकबस्त लखनवी

 

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ऐसे भी हैं अहले-चमन, जिन्हें आज तक यह पता नहीं
जो गुलों के रंग में है अयाँ, खार में है वही लहू।


1. अहले-चमन - चमन वाले 2. अयाँ - प्रकट
 

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कांटा समझ के मुझ से न दामन बचाइए,
गुजरी हुई बहार की इक यादगार हूँ।

-मुशीर झंझानवी

 

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