शेर-ओ-शायरी

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कांटे किसी के हक में, किसी को गुलो-समर,
क्या खूब एहतिमामे-गुलिस्ताँ है आजकल।
-'जिगर' मुरादाबादी
1. गुलो-समर - फूल और फल 2. एहतिमाम - प्रबन्ध

 

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कांटों पर अगर चलना ही पड़े,

 मायूस  न  हो  जाना  राही
जब फूल हों दिल के दामन में,

फिर क्या है जो इन्सां कर न सके।

 

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कांटों से घिरा रहता है चारों तरफ से फूल,
फिर भी खिला ही रहता है, क्या खुशमजाज है।

 

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कांटों का भी हक है आखिर,
कौन छुड़ाए दामन अपना।

-जिगर मुरादाबादी
 

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