शेर-ओ-शायरी

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काँटों की जुबाने-तिश्ना से गुलशन की हकीकत को पूछो,
याराने-चमन इन फूलों को तो हंसना, हंसाना आता है।
-'अलम' मुफ्फरनगरी

1.तिश्ना - प्यासा, तृषि, पिपासित, अतृप्त

2. याराने-चमन - चमन से दोस्ती करने वाले

 

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कांटों से मुहब्बत करते हैं,किरदार तो देखो फूलों का,
जख्मों से कलेजा फट जाये, पर साथ निभाना पड़ता है।
 

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कितने कांटों की बद्दुआ ली है
चन्द कलियों की जिन्दगी के लिए।
-शहीद फातिमी

 

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खुशी के साथ रंजो-गम के भी एहसास बाकी हैं,
गुलों के शाख पर पत्ते नहीं, कांटे भी होते हैं।
-'साजन' पेशावरी
 

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