शेर-ओ-शायरी

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पहलू-ए-गुल में खार भी हैं कुछ छुपे हुए,
हुस्नै-बहार देख तो दामन बचा के देख।
-'दिल' शाहजहाँपुरी
 

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फूल चुनना भी अबस, सैरे-बहारां भी अबस,
दिल का दामन ही जो कांटों से बचाया न गया।
-मुईन अहसन 'जज्बी'


1.अबस - व्यर्थ

 

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फूलों के इन्तिजार में कांटों से भी निभाइए,
यानी खुशी के वक्त गम का शऊर चाहिए।
 

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बहुत हसीं सही सोहबतें गुलों की मगर,
जिन्दगी वो है जो कांटों के दरमियां गुजरे।

 

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