शेर-ओ-शायरी

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बागे-हस्ती में सबक लें, फूल से अहले-नजर,
जिसने की उम्र बसर तबस्सुम से खारों में।
-कौसर


1.अहले-नजर - समझदार, पारखी 2. तबस्सुम - मुस्कान

3.खार - काँटा
 

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रफीकों से रकीब अच्छे हैं जो जलकर नाम लेते हैं,
गुलों से खार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं।


1.रफीक - मित्र, सखा, दोस्त 2.रकीब - किसी स्त्री से प्रेम करने

वाले दो व्यक्ति परस्पर रकीब होते हैं।
 

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वह एक तुम, तुम्हें फूलों पै भी न आई नींद,
वह एक मैं, मुझे कांटों पै भी इज्तिराब न था।
-नैयर अकबराबाजदी


1.इज्तिराब - ब्याकुलता, बेचैनी

 

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संवारना है अगर तुमको गुलशने-हस्ती,
तो पहले कांटों में उलझाओ जिन्दगानी को।

 

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