शेर-ओ-शायरी

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जरा मुल्क के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे, ये गलियाँ, ये मंजर दिखाओ।
ये पुरपेच गलियाँ, ये बेख्वाब बाजार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार।
ये इस्मत के सौदे, ये सौदे पै तकरार
कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफिज खुदी के
सनाख्वाने -तकदीसे मशरिक कहां हैं

-साहिर लुधियानवी


1.पुरपेच - टेढ़ी-मेढ़ी 2.बेख्वाब -जिसे नींद न आये, अनिद्र
(यानी न बंद होने वाले बाजार)

3.गुमनाम - जिसे कोई जानता न हो, अज्ञात

4.इस्मत - सतीत्व,पातिव्रत्य
5.तकरार - वाद-विवाद, बहस, कही हुई बात को बार-बार कहना

6.खुदी - यह भाव कि बस हमीं हम हैं, अहंकार, अभिमान
7. सनाख्वाने तकदीसे-मशरिक - पूरब (यानी पूर्वी सभ्यता) की पवित्रता या श्रेष्ठता का गुणगान करने वाले


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न आने दिया राह पर रहबरों ने
किये लाख मंजिल ने हमको इशारे।

-'अर्श' मल्सियानी

 

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बफैजे-मस्लेहत ऐसा भी होता है जमाने में
कि रहजन को अमीरे-कारवां कहना ही पड़ता है।
-जनगन्नाथ आजाद


1.बफैजे-मस्लेहत - दुनियादारी के कारण 2.रहजन - लूटेरा, डाकू 3.अमीरे-कारवां - कारवों का सरदार

 

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रहजनों से तो भाग निकला था
अब मुझे रहबरों ने घेरा है।


1.रहजन – लुटेरा, बाटमार, रास्ते में पथिकों को लूट लेने वाला

 2.रहबर- पथप्रदर्शक, आगे-आगे चलने वाला, रास्ता बताने वाला
 

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