शेर-ओ-शायरी

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ऐ शम्अ! तुम पै रात यह भारी है जिस तरह,
मैंने तमाम उम्र गुजारी है उस तरह।

-'नातिक' लखनवी
 

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कई इन्किलाबात आये जहाँ में,
मगर आज तक दिन न बदले हमारे।

-रजा हमदानी


1.इन्किलाबात-उलट-पुलट, परिवर्तन, क्रान्ति, समय का उलट-फेर (इन्ब्किलाब का बहुवचन )

 

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कफस में गुफ्तगू यह सुन दिल का खून होता है,
न छेड़ों बाजुओं के तजकिरे, परवाज की बातें।
-'मुनव्वर' लखनवी


1.कफस- पिंजड़ा, कारागार

2. तजकिरा -जिक्र, चर्चा, वार्तालाप, बातचीत 3. परवाज-उड़ान।
 

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कफस में जी नहीं लगता है, आह फिर भी मेरा,
यह जानता हूँ कि तिनका भी आशियाँ में नहीं।
-'अजीज' लखनवी


1.कफस- पिंजरा, कारागार।

 

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