शेर-ओ-शायरी

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कफस से छूटकर पहुँचे न हम दीवारे-गुलशन तक,
रसाई आशियां तक किस पर बेबालोपर होती।

-'जलील' मानिकपुरी


1.कफस-पिंजड़ा, कारागार 2. रसाई- पहुँच।

3.बेबालोपर - बेबस, निस्सहाय ,निराश्रय  बेबस , जिसके पास जीविका का कोई साधन न हो 

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कब तक पियें यह जहरे-गम ऐ साकिए-हयात,
घबरा गये हैं अब तेरी दरियादिली से हम।

-'मख्मूर' सईदी


1.दरियादिली -
उदारता, फराखदिली 2.साकिए-हयात-जीवन रूपी साकी

 

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कभी जो मैंने मसर्रत का एहतिराम किया,
बड़े तपाक से गम ने मुझे सलाम किया।


1.एहतिराम -आदर, इज्जत, सम्मान 2. तपाक-(i) प्रेम, प्यार (ii)आवभगत (iii)आदर, सोउत्साह(iv) गर्मजोशी, संभ्रान्ति
 

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कभी बिजली, कभी गुलचीं, कभी सैयाद की नज़रें,
गुजरगाहे-हवादिस था, हमारा आशियाँ क्या था?

-शौकत थानवी


1.गुलचीं -फूल चुनने या तोड़ने वाला 2. सैयाद- बहेलिया, चिड़ीमार, व्याध
3. गुजरगाह- मार्ग, रास्ता, पथ, निकलने-पैठने का स्थान

4. हवादिस-दुर्घटनाएं, हादिसे

 

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