शेर-ओ-शायरी

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कमजोर हुए अश्कों से घर के दरो-दीवार,
रोने के लिये लेंगे, कराये का मकाँ और।

-'रियाज' खैराबादी
 

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कलेजे में हजारों दाग, दिल में हसरतें लाखों,
कमाई ने चला हूँ साथ अपने जिन्दगी भर की।

-'शायर' कजलबाश


1.हसरत –(i) निराशा, नाउम्मेदी, (ii) अभिलाषा, लालसा, इच्छा

 

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कहते हैं उम्मीद पै जीता है जमाना,
क्या करे जिसकी कोई उम्मीद नहीं है?

-'आसी' उल्दानी
 

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कहते हैं जीते हैं उम्मीद पै लोग,
हमको जीने की उम्मीद नहीं।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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