शेर-ओ-शायरी

<< Previous  रंज-ओ-ग़म  (Sorrows and sufferings)  Next>>

कहीं बिजली, कहीं गुलचीं, कहीं सैयाद का खतरा,
फले-फूलेगी इस गुलशन में शाखे-आशियाँ क्यों कर।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी


1.गुलचीं-फूल चुनने या तोड़ने वाला 2.सैयाद-बहेलिया, व्याध, चिड़ीमार

 3. शाखे-आशियाँ-शाख जिस पर आशियाना बना हो


*****


कहीं भी कोई भी नहीं खुश इस जमाने में,
न आशियाँ के भीतर, न आशियाँ के बाहर।

 

*****

काविशे-सैयाद, जोरे-बागबां, खारे-खिजां,
कैसे-कैसे दाग लेकर हम चमन से जायेंगे।


1.काविश-चिन्ता,फिक्र 2.सैयाद-बहेलिया, चिड़ीमार, व्याध, शिकारी, आखेटक, लुब्धक 3. जोर-जुल्म, अत्याचार, सितम 4. बागबां-माली, बाग की रख-रखाव करने वाला, उद्यानपाल 5. खार-कांटा, कंटक 6. खिजां-पतझड़ की ऋतु
 

*****


किस तरह तुमको बना लूँ मैं शरीके-जिन्दगी,
मैं तो अपनी जिन्दगी का बार उठा सकता नहीं।
यास की तारीकियों में डूब जाने दो मुझे,
अब मैं शम्ए-आरजू की लौ बढ़ा सकता नहीं।

-'साहिर' लुधियानवी


1.बार-बोझ, भार 2. यास-निराशा, नाउम्मेदी 3.तारीकी -अंधेरा, अंधियारा, अंधकार


*****
 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58     Next >>