शेर-ओ-शायरी

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कैदे-हयातो-बंदे-गम अस्ल में दोनों एक हैं,
मौत से पहले आदमी गम से नजात पाए क्यों?

-मिर्जा गालिब


1.कैदे-हयात-जीवन की कैद 2 बंदे-गम -गमों की कैद

 

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कोई वीरानी - सी वीरानी है,
दश्त को देखकर घर याद आया।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नजर नहीं आती,
मौत का एक दिन मुयय्यन हैं, नींद क्यों रात भर नहीं आती।
आगे आती थी हाले-दिल पै हंसी अब किसी बात पै नहीं आती,
हम वहाँ हैं जहाँ से हमको भी कुछ हमारी खबर नहीं आती
मरते हैं आरजू में भरने की, मौत आती है पर नहीं आती।

-मिर्जा गालिब


1.बर-सफल, कामयाब 2. मुयय्यन-नियत, निश्चित्, मुकर्रर
 

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कोई मुझसा मुस्तहके-रहमो-गमख्वारी नहीं
सौ मरज है और बजाहिर कोई बीमारी नहीं।

-'नजर' लखनवी


1मुस्तहके-रहमो-गमख्वारी- हमदर्दी या सहानुभूति और करूणा या तरस का पात्र 2. बजाहिर -बाहर से

 

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