शेर-ओ-शायरी

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क्या शम्अ के नहीं हैं हवाख्वार अहले-बज्म,
हो गम ही जाँगुदाज तो गमख्वार क्îया करें?

-मिर्जा 'गालिब'


1.हवाख्वार-भला चाहने वाला, शुभचिंतक, खैरख्वाह 2. अहले-बज्म-महफिल
 वालों 3. जाँगुदाज-जानेलेवा, जाँसिता, प्राणघातक

4. गमख्वार-हमदर्द, सहानुभूति करने वाला, दुख-दर्द का साथी
 

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क्यों गर्दिशे-मुदाम से घबरा न जाये दिल,
इन्सान हूँ पियाला-ओ सागर नहीं हूँ मैं।
यारब जमाना हमको मिटाता है किस लिये,
लौहे-जहॉ पै हर्फे-मुकर्रर नहीं हूँ मैं।

-मिर्जा 'गालिब'


1.गर्दिशे-मुदाम-न खत्म होने वाला सांसारिक चक्कर
2. सागर-प्याला, पात्र -प्राचीन काल में सारे लोग एक ही पात्र से पीते थे, इसलिए निरंतर घूमता रहता था 3. लौहे-जहाँ- संसार रूपी तख्ती।

4.हर्फे-मुकर्रर-दुबारा लिखा हुआ यानी फालतू का अक्षर

 

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खत्म कर देगी किसी दिन ये तमन्ना-ए-हयात,
रात-दिन कोशिश में जीने की मरा जाता हूँ मैं।
जिन्दगी के दाम इतने गिर गये कुछ गम नहीं,
मौत की बढ़ती हुई कीमत से घबराता हूँ मैं।

-नीरज जैन


1.हयात-जिन्दगी
 

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खामोशी में निहाँ खूंगश्ता लाखों आरजूएं हैं,
चिरागे - मुर्दा हूँ मैं, बेजुबाँ गोरे-गरीबाँ का।
नहीं मालूम किस-किस का लहू पानी हुआ होगा,
कयामत है सरश्क-आलूदा होना तेरी मिज्गाँका।

-मिर्जा 'गालिब'


1.निहाँ - गुप्त, छुपा हुआ 2.खूंगश्ता - जिनका खून हो गया हो

3.चिरागे-मुर्दा -बुझा हुआ चराग 4.बेजुबाँ- जो किसी की शिकायत न करता है, जो कुछ कहना न जनता हो 5.गोरे-गरीबाँ -परदेसी  या गरीब की कब्र या समाधि 6.सरश्क-आलूदा- आंसुओं से ओतप्रोत या लिप्त

 7.मिज्गाँ - आँख

 

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