शेर-ओ-शायरी

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खामोशी में मुसीबत और भी संगीन होती है,
तड़प ऐ दिल तड़पने से जरा तस्कीन होती है।

-'शाद' अजीमाबादी


1.संगीन-(i) सख्त, कड़ा, कठोर, (ii) बेरहम, निर्मम, निष्ठुर, निर्दय (iii) गंभीर 2. तस्कीन- (i) संतोष, इत्मीनान (ii) सांन्त्वना, ढाढस, दिलासा

खामोशी में निहाँ, खूंगश्ता लाखों आरजूएं हैं,
चिरागे-मुर्दा हूँ मैं बेजुबाँ गोरे-गरीबाँ का।

-मिर्जा 'गालिब'

 

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1.निहाँ-छुपा हुआ, निहित 2 खूंगश्ता-जिनका खून हो गया हो 3. चिरागे-मुर्दा-बुझा हुआ चराग। 4.गोरे-गरीबा-किसी या गरीब परदेसी की कब्र

 

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खिजाँ को सहने-गुलिस्ताँ से गये जमाना हुआ,
अभी भी फिजा-ए-गुलिस्ताँ में उड़ रहा है गुबार।

-जगन्नाथ 'आजाद'


1.खिजाँ- पतझड़ 2. सहन- आँगन 3. फिजा-(i) वातावरण, माहौल (ii) शोभा, रौनक, बहार (iii) खुली हुई हरियालीदार जगह 4. गुबार-(i) धूल, रज (ii) मनोमालिन्य, दिल का मैल
 

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खिजाँ-नसीब मुकद्दर का दिल न दुख जाये,
चमन में शोर है फस्ले-बहार के आने का।

-'नदीम' कासिमी


1.खिजाँ- पतझड़ ऋतु 2. फस्ले-बहार- वसन्त ऋतु

 

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