शेर-ओ-शायरी

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गमे-जहाँ से फराग मिलता तो हम खुदा से पूछ लेते,
जहाँ के मालिक तेरे जहाँ में कभी हमें भी खुशी मिलेगी।

-'नैयर' सीमाबी


1.फराग - मुक्ति, नजात
 

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गमे-नाकामिए - हयात सही,
देने वाले ने कुछ दिया तो है।

-मुनव्वर लखनवी


1.हयात- जिन्दगी

 

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गर जिन्दगी में मिल गये फिर इत्तिफाक से,
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।

-साहिर लुधियानवी
 

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गुबारे-कारवाँ का जर्रा-जर्रा,
मेरी बर्बादियों की दास्तां है।

-'दिल' शाहजहाँपुरी


1.गुबार-धूल, रज

 

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