शेर-ओ-शायरी

<< Previous  रंज-ओ-ग़म  (Sorrows and sufferings) Next>> 

घर बयाबां में बनाया नहीं हमने लेकिन,
जिसको घर समझे हुए थे, बयाबां निकला।

-मिर्जा 'गालिब'


1.बयाबां-वन, जंगल, अरण्य
 

*****


घर हमारा जो न रोते भी तो वीरां होता,
बहर अगर बहर न होता बयाबां होता।

-मिर्जा 'गालिब'


1.बहर-सागर, समुद्र 2.
बयाबां-वन, जंगल, अरण्य

 

*****

घुट-घुट के मर न जाए तो बतलाओ क्या करे,
वह बदनसीब जिसका कोई आसरा न हो।

-'असर' लखनवी
 

*****


चमन को याद करके देर तक आंसू बहाता हूँ,
कोई तिनका जो मिल जाता है उजड़े आशियाने का।

-'शाद' अजीमाबादी
 

 *****
 

<< Previous  page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46-47-48-49-50-51-52-53-54-55-56-57-58 Next >>