शेर-ओ-शायरी

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चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन,
हमारी जेब को अब हाजते-रफू क्या है?
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा,
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है?

- मिर्जा गालिब


1.पैराहन-वस्त्र, लिबास 2. हाजत-(i) जरूरत, आवश्यकता (ii) ख्वाहिश, अभिलाषा 3. जुस्तजू- तलाश, खोज
 

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छोड़ दीजे मुझको मेरे हाल पर,
जो गुजरती है गुजर ही जायेगी।

-'असर' लखनवी

 

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जंगलों में जो मुसाफिर सर पटक के मर गया,
अब उसे आवाज देता कारवाँ, आया तो क्या?

-'जोश' मलीहाबादी
 

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जब तवक्को ही उठ गई 'गालिब',
क्यों किसी का गिला करे कोई।
मुनहसिर मरने पै हो जिसकी उम्मीद,
नाउम्मेदी उसकी देखा चाहिए।

-मिर्जा गालिब


1.तवक्को - आशा, उम्मीद, भरोसा

2. फना-(i) नष्ट, बरबाद (ii) मृत्यु, मौत (iii) लुप्त, गाइब
 

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