शेर-ओ-शायरी

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जब चली आसमाँ से कोई बला,
सीधा मेरे मकान पर, आई।

-'रियाज' खैराबादी
 

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जब दिल में जरा भी आस नहीं,

इजहारे-तमन्ना कौन करे,
अरमान किये दिल ही में फना,

अरमान को रूसवा कौन करे?
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'

 

1.रूसवा-बदनाम

 

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जमाना देख सका जब न शादमा मुझको,
बना दिया गमे-दौरां का पासबां मुझको।

-निसार सीमाबी


1.गमे -दौरां -सांसारिक दुख, जीवन की व्यथाएं

2.पासबां-निरीक्षक, द्वारपाल, ड्योढ़ीवान, प्रहरी
 

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जला है जिस्म जहाँ, दिल भी जल गया होगा,
कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है?

-मिर्जा 'गालिब'


1.जुस्तजू- तलाश, खोज


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