शेर-ओ-शायरी

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जिन्दगी इक आंसुओं का जाम था,
पी गये कुछ और कुछ छलका गये।

-शाहिद कबीर
 

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जिन्दगी क्या है आज, इसे ऐ दोस्त,
सोच लें और उदास हो जायें।

-'फिराक' गोरखपुरी

 

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जिस तरह हंस रहा हूँ मैं पी-पी के अश्के-गम,
अगर दूसरा कोई हो तो कलेजा निकल जाए।

 

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जिसकी कफस में आंख खुली हो मेरी तरह,
उसके लिए चमन की खिजां क्या बहार क्या?


1.कफस-पिंजड़ा, कारागार 2.खिजाँ-पतझड़

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